कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को भवसागर से पार लगाने का माध्यम : स्वामी सुधीरानंद जी महाराज
लखनऊ। वृंदावन योजना सेक्टर-11 स्थित ज्ञान सरोवर विद्यालय में अखिल भारतीय उत्तराखंड महासभा (धार्मिक प्रकोष्ठ) की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम एवं अंतिम दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास परम पूज्य स्वामी श्री सुधीरानंद जी महाराज ने रुक्मणी विवाह, भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका लीला एवं उनके स्वधाम गमन के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
महाराज श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मात्र ही मनुष्य को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति दिलाने का मार्ग प्रशस्त करता है। सात दिनों तक चलने वाली इस कथा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। हमारे शरीर में भी सात चक्र होते हैं और भागवत कथा के श्रवण से अंतःकरण की शुद्धि होती है। उन्होंने कहा कि कलियुग में श्रीमद्भागवत ही मनुष्य को भवसागर से पार लगाने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान ने अपने अवतार काल में 125 वर्षों तक विभिन्न लीलाओं के माध्यम से संसार को यह संदेश दिया कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सदैव धर्म और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।

कथा के समापन अवसर पर सभी यजमानों श्री भवान सिंह रावत, श्री हरीश रौतेला, श्री आर.पी. जुयाल, श्रीमती पुष्पा देवी, श्री सुशील कुमार वाजपेयी एवं श्री पूरन सिंह बिष्ट ने व्यास पीठ का विधिवत पूजन कर महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नम आंखों से भागवत जी को विदाई दी।
महासभा के मीडिया प्रभारी अशोक असवाल ने बताया कि रविवार, 1 नवंबर को प्रातः 9 बजे हवन एवं पूजन का आयोजन होगा। इसके पश्चात दोपहर 12 बजे से विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
उन्होंने बताया कि भागवत कथा यज्ञ के समापन अवसर पर सनराइज मेडिकेयर सेंटर एवं राज पॉली क्लीनिक के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, जांच शिविर एवं औषधि वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक चलने वाले इस शिविर में अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा रक्तचाप (बीपी), मधुमेह (शुगर), हीमोग्लोबिन, श्वास रोग, दंत रोग, नेत्र रोग एवं ईसीजी सहित विभिन्न स्वास्थ्य जांच निःशुल्क की जाएंगी।
इस अवसर पर डॉ. के.डी. जोशी, प्रेम सिंह दिगारी, पूरन बिष्ट, महेंद्र सिंह राणा, विनोद खंतवाल, बहादुर सिंह बिष्ट, डी.डी. नरियाल, राजेन्द्र सिंह रावत, जगदीश बिष्ट, किशन सिंह बिष्ट, महावीर खन्तवाल, श्रीमती संगीता रावत, श्रीमती सुशीला रौतेला, बिमला बिष्ट, नीलम जुयाल, रेनु शर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।